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हमारे बारे में

वेलुमिक फाउंडेशन तीन उद्देश्यों — डीप-टेक्नोलॉजी शिक्षा, पशु एवं पारिस्थितिक कल्याण, और विरासत संरक्षण — को एक ही धर्मार्थ चार्टर के अंतर्गत लाता है, क्योंकि तीनों एक ही बात पर निर्भर हैं: ऐसे लोग जो अपने से आगे टिकने वाली कोई चीज़ बनाने को तैयार हों। आगे इस विचार के पीछे की कानूनी और संगठनात्मक जानकारी है — इसे पढ़िए, क्योंकि जो संस्था आपका भरोसा मांग रही है, उसे अपना काम दिखाना चाहिए।

वेलुमिक फाउंडेशन को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अंतर्गत एक कंपनी के रूप में निगमित किया गया है — यह वह विशेष कानूनी स्वरूप है जो धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए बनाई गई कंपनियों के लिए आरक्षित है, जो अपने सदस्यों को लाभ नहीं बाँट सकतीं और जिसके संस्थापकों का दायित्व सीमित होता है। इसका पंजीकृत कार्यालय उत्तर प्रदेश में है, और इसके उद्देश्यों का विस्तार पूरे भारत में है।

हम अभी कहाँ हैं

  1. धारा 8 कंपनी के रूप में निगमित2026
  2. कर एवं वैधानिक पंजीकरणप्रक्रियाधीन
  3. ऑनलाइन दानप्रक्रियाधीन
  4. हमारा पहला कार्यक्रमअभी निर्धारित नहीं

हमारा दृष्टिकोण

हमारा मानना है कि किसी देश का भविष्य ठीक वैसे ही बनता है जैसे उसका अतीत सहेजा जाता है — धैर्य से, सटीकता से, और उन लोगों के हाथों जो अधूरे काम को यूं ही नहीं छोड़ते। वेलुमिक फाउंडेशन इसी विश्वास को अमल में लाने के लिए बना है — भारत के अगले दशक को चाहिए ऐसे वैज्ञानिक तैयार करना, हमारे आसपास के जानवरों और ज़मीन को वह देखभाल देना जो वे खुद माँग नहीं सकते, और हमारे पुरखों की पीढ़ी की सहेजी हुई जानकारी को बिना लिखे मिटने से पहले बचाना।

मोटी शाखाओं से लटकती बरगद की हवाई जड़ों का पर्दा, और ऊपर हरे पत्ते।
प्रतीकात्मक चित्र Sumasa / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

हमारा मिशन

हमारा मिशन कहने में सरल है और करने में कठिन: ऐसी संस्थाएं बनाना — प्रयोगशालाएं, आश्रयस्थल, अभिलेखागार — जो उन्हें शुरू करने वालों से भी लंबे समय तक टिकें, और जिन्हें सीखने, मदद करने या याद रखने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति के लिए खुला रखा जाए।

संस्थापक निदेशक
वेलुमिक फाउंडेशन की स्थापना अनीता मिश्रा और रवि प्रकाश मिश्रा द्वारा की गई थी, जो गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।
शेयर पूंजी
वेलुमिक फाउंडेशन की अधिकृत शेयर पूंजी ₹1,00,000 है, जो ₹10 प्रत्येक के 10,000 इक्विटी शेयरों में विभाजित है। यह एक कंपनी-कानूनी ढाँचा है, न कि कोई दान-निधि या धन-संग्रह लक्ष्य — धारा 8 के अंतर्गत इसमें से कोई भी राशि सदस्यों को लाभ के रूप में नहीं दी जा सकती; यह केवल कंपनी के कानूनी स्वरूप को स्थापित करने के लिए है।

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